चीखों की भाषा से अर्जी दफा कराई जाती है

चीखों की भाषा से अर्जी दफा कराई जाती है…

प्रसिद्ध कवि प्रदीप मायूस के जन्मदिन पर कवि सम्मेलन का आयोजन, कवियों ने किया काव्य पाठ
शामली। शहर के प्रसिद्ध कवि प्रदीप मायूस के जन्मदिन पर उत्तर प्रदेश साहित्य सभा द्वारा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कवि प्रदीप मायूस को कमल तोड शायर के सम्मान से नवाजा गया। सम्मेलन में कवियाआंे ने एक से बढकर एक काव्य पाठ किया।
जानकारी के अनुसार मंगलवार को शहर के प्रसिद्ध कवि प्रदीप मायूस के जन्मदिन पर हनुमान धाम स्थित एडवोकेट श्रीकांत शर्मा के कार्यालय पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर पालिका चेयरमैन अरविन्द संगल रहे। इस अवसर पर कवि प्रदीप मायूस को कमलतोड शायर के सम्मान से भी नवाजा गया। इस अवसर पर प्रदीप मायूस ने कहा कि जितने भी मेरे दोस्त थे, रिश्ते में भाई थे, पलभर में मेरे दोस्त जमाना बदल गया, मेरी खुशी को देखके जलने लगे हैं सब, मेरी खता ये थी कि मैं आगे निकल गया। वहीं पवन कुमार पवन ने कहा कि आप बेहद हमें दह गए, हमसे जब तक हुआ सह गए। कवि डा. प्रीतम सिंह प्रीतम ने कहा कि आहों की अनदेखी करके क्षमा दबाई जाती है, चीखों की भाषा से अर्जी दफा कराई जाती, स्वास्थ्य की चर्खी मंे जब-जब सच को पेला जाता है, मजबूरी के चंगुल में संतोष धकेला जाता है। कवि डा. योगेन्द्र सुंदरियाल ने कहा कि स्वप्न नयन में पल जाने से,भाग्य उदय नहीं होता है, कुछ भी नहीं होता है अगर अपना समय नहीं होता है। जीवन समर में आते हो तो तुमको शस्त्र उठाने होंगे, हाथ पर हाथ धरे रहने से, कुछ भी विजय नहीं होता है। इसके अलावा अनिल पोपट कामचोर, श्रीकांत एडवोकेट, सुधीर जगधर, सत्यप्रकाश त्यागी सत्य ने भी अपनी-अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर सुनील टम्मी, पं. राजीव भावग्य, वसीम झिंझानवी, बलराज मलिक, सीमा कुरुक्षेत्र, श्वेता शर्मा, सरदार मंजीत सिंह गाजियाबादी, रमेश चन्द्रा आदि भी मौजूद रहे।