शब-ए-बरात के अवसर पर कैराना में काव्य गोष्ठी, उर्दू के संरक्षण पर कवियों का जोर
शब-ए-बरात के अवसर पर कैराना में काव्य गोष्ठी, उर्दू के संरक्षण पर कवियों का जोर

कैराना।
शब-ए-बरात के मुबारक अवसर पर कैराना की स्थानीय साहित्यिक संस्था अंजुमन फ़रोग़-ए-उर्दू अदब के तत्वावधान में एक भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस साहित्यिक आयोजन की अध्यक्षता मोहम्मद उमर शमशाद अंसारी ने की, जबकि संचालन का दायित्व अंसार सिद्दीकी ने शालीनता और प्रवाह के साथ निभाया।

अगोष्ठी में उपस्थित कवियों ने अपने विचारों और काव्य पाठ के माध्यम से उर्दू भाषा के संरक्षण, प्रचार और विकास पर विशेष बल दिया। वक्ताओं ने कहा कि मदरसे, साहित्यिक बैठकें और काव्य मंच आज भी उर्दू भाषा को जीवंत बनाए हुए हैं और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

काव्य गोष्ठी के दौरान प्रस्तुत चुनिंदा शेरों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कवि तनवीर कुरैशी ने नातिया रंग में कहा
दोनों आलम को है तस्लीम ग़ुलामी उनकी,
दोनों आलम के हैं सुल्तान मदीने वाले।
शादाब सहर चरथावली ने संसार की नश्वरता को इन शब्दों में व्यक्त किया
इस फ़ना होने वाली दुनिया को,
तुम रिहाइश समझ रहे हो क्या।
अंसार सिद्दीकी ने विश्वास और रिश्तों की नज़ाकत पर कहा
ज़रा सा शक हुआ था बस हमें उसकी वफ़ाओं पर,
फिर उसके बाद उसको राज़दां हमने नहीं रखा।
उस्मान उस्मानी ने नई पीढ़ी पर व्यंग्य करते हुए कहा
हैरान हैं मां-बाप के इस दौर का बच्चा,
चालाक बहुत है मगर होशियार नहीं है।
उमर अंसारी ने अमन और फ़साद के विरोधाभास को यूं बयान किया
जो फिर रहा था अमन का परचम लिए हुए,
बस्ती उसी की नज़र-ए-फ़सादात हो गई।
मुज़म्मिल कैरानवी ने हालात की करवट को इस तरह पेश किया
जब वह शरीक़-ए-जश्न-ए-मसर्रत न हो सका,
वह शाम नज़र-ए-गर्दिश-ए-हालात हो गई।
अब्दुल्लाह रबाब ने रूमानी अंदाज़ में कहा
सजने को सज गई है सितारों की अंजुमन,
दिल को किसी हसीन का मगर इंतज़ार है।
वहीं ग़फ़्फ़ार सैफ़ी ने मोहब्बत के जज़्बात को इन पंक्तियों में ढाला
रह कर न दूर आप मुझे यूं सताइए,
नज़दीक आइए, मेरे नज़दीक आइए।
अंत में अध्यक्षीय संबोधन में मोहम्मद उमर शमशाद अंसारी ने कहा कि ऐसी साहित्यिक गोष्ठियां उर्दू भाषा और साहित्य की निरंतरता के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इस अवसर पर मोइनुद्दीन अंसारी व सलीम अंसारी सुमीत बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम का समापन दुआ के साथ हुआ।





















































