धार्मिक स्वतंत्रता के पक्ष में इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला, समाज ने किया स्वागत
धार्मिक स्वतंत्रता के पक्ष में इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला, समाज ने किया स्वागत

कैराना।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि धार्मिक सभाओं के आयोजन के लिए पूर्व सरकारी अनुमति को अनिवार्य नहीं ठहराया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और धार्मिक आयोजन करने की पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त है।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि धार्मिक पूजा-पाठ और सभाएं तब तक पूरी तरह वैध हैं, जब तक वे शांति, सार्वजनिक व्यवस्था और कानून की सीमाओं के भीतर आयोजित की जाएं। केवल आशंकाओं या संदेह के आधार पर धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगाना न तो संवैधानिक है और न ही लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप। हालांकि, संवेदनशील परिस्थितियों में प्रशासन को कानून के दायरे में रहते हुए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार रहेगा।

इस फैसले का दीन एवं सामाजिक संगठनों द्वारा स्वागत किया जा रहा है। कारी मुबीन शाह और कारी मेहरबान ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय को इस साहसिक और दूरदर्शी निर्णय के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह फैसला धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों की मजबूती का प्रतीक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस निर्णय से धार्मिक सौहार्द को बढ़ावा मिलेगा और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी।





















































