कुरान पर अमल ही सफलता की कुंजी, मदरसे धर्म की आधारशिला : मौलाना जुबैर रहमानी

कुरान पर अमल ही सफलता की कुंजी, मदरसे धर्म की आधारशिला : मौलाना जुबैर रहमानी

मुजफ्फरनगर, 27 जनवरी
जिले के अंतर्गत शाहपुर क्षेत्र के गांव बसी कलां स्थित मदरसा मुजफ्फरिया में आयोजित वार्षिक कार्यक्रम में वक्ताओं ने धार्मिक शिक्षा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मौलाना जुबैर रहमानी ने कहा कि इस्लाम का पहला मदरसा मक्का में स्थापित हुआ, जबकि मदीना में बने मदरसा सुफ्फा ने शिक्षा और संस्कार की मजबूत परंपरा की नींव रखी, जिसकी रोशनी आज भी पूरी दुनिया में फैली हुई है।

उन्होंने कहा कि कुरान केवल याद करने या पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि उसके अनुसार जीवन को सही दिशा देने के लिए उतारा गया है। मौलाना ने बताया कि कुरान को कंठस्थ करने वालों के लिए विशेष सम्मान है, लेकिन उसके आदेशों पर चलना सबसे अधिक आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नमाज भले ही मस्जिद में अदा की जाती है, लेकिन उसे सही तरीके से सीखने का स्थान मदरसा ही होता है। इसी तरह अंतिम संस्कार, विवाह और अन्य धार्मिक कार्यों की विधि भी मदरसों के माध्यम से ही सिखाई जाती है। उनके अनुसार समाज की नींव मदरसे होते हैं और जब नींव मजबूत होती है, तो आने वाली पीढ़ियां भी सशक्त बनती हैं।

मदरसे के प्रधानाचार्य मुफ्ती ताहिर मिफ्ताही ने अपने संक्षिप्त लेकिन सारगर्भित वक्तव्य में कहा कि मदरसे केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं, बल्कि आस्था, नैतिकता और चरित्र निर्माण के संस्थान हैं। यहां से निकलने वाले छात्र समाज में सदाचार, संतुलन और धार्मिक चेतना को आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक धार्मिक शिक्षा को मजबूती नहीं मिलेगी, तब तक समाज वैचारिक अस्थिरता से सुरक्षित नहीं रह सकता।

कार्यक्रम में मुफ्ती मुजम्मिल बदायूंनी ने कहा कि बच्चों को केवल कुरान कंठस्थ कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अच्छे संस्कारों वाला, कर्मठ और धार्मिक परंपराओं का पालन करने वाला नागरिक बनाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

कार्यक्रम के दौरान मदरसा मुजफ्फरिया के प्रधानाचार्य मुफ्ती ताहिर मिफ्ताही की सेवाओं, सादगी और छात्रों की शिक्षा-दीक्षा के प्रति समर्पण की सराहना की गई। वक्ताओं ने कहा कि उनकी निष्ठा और परिश्रम से मदरसा निरंतर प्रगति कर रहा है।

इस अवसर पर आठ बच्चों के कुरान कंठस्थ(हिफज़)करने पर सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जबकि तीन बालिकाओं ने कुरान पठन(नाज़रा) पूरा किया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने बच्चों की उपलब्धि पर खुशी जताई।

पूरे आयोजन में धार्मिक, सामाजिक और शिक्षित वर्ग के लोगों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कार्यक्रम का वातावरण श्रद्धा, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहा।