माध्यमिक विद्यालयों को अलग-अलग क्रिया कलाप के लिए बाध्य करने पर आक्रोश

माध्यमिक विद्यालयों को अलग-अलग क्रिया कलाप के लिए बाध्य करने पर आक्रोश

 


वित्तविहीन विद्यालय प्रबंधन महासभा ने की इन क्रिया कलापों पर प्रतिबंध लगाने की मांग
अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा को भेजा ज्ञापन, राहत न मिलने पर न्यायालय में जाने की चेतावनी

शामली। वित्तविहीन विद्यालय प्रबंधन महासभा ने अशासकीय असहायिक वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयांे को आए दिन अलग-अलग आदेश जारी कर अतिरिक्त क्रिया कलापों के लिए बाध्य किए जाने पर आक्रोश व्यक्त करते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पर प्रदर्शन किया तथा अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा को ज्ञापन भेजकर अतिरिक्त क्रिया कलापों को प्रतिबधित करने की मांग की।


जानकारी के अनुसार बुधवार को वित्तविहीन विद्यालय प्रबंधन महासभा के दर्जनों पदाधिकारियांे ने जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पर पहुंचकर अशासकीय असहायिक वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों में अतिरिक्त क्रिया कलापों पर प्रतिबंध की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। महासभा के अध्यक्ष डा. देवेन्द्र पाल राणा ने कहा कि माध्यमिक विद्यालयों में प्रति दिन अलग-अलग आदेश जारी करके विद्यालयों के अलावा अतिरिक्त क्रिया कलापों जिनमें वोट बनवाना, स्वच्छता पखवाडा, नशा मुक्त भारत, पुस्तक मेला, विभाजन विभीषिका स्मृति आदि कराए जाने के लिए बाध्य किया जा रहा है। करीब दो सालों से ऐसे क्रिया कलापों की बाढ आ गयी है जिस कारण स्कूलों के बच्चों की पढाई भी प्रभावित हो रही है। विभाग द्वारा अप्रैल से सत्र प्रारंभ कराना केवल औपचारिकता बनकर रह गया है क्योंकि प्रवेश तिथि को सितम्बर तक बढाया जाता है। ऐसे में भी कभी कांवड अवकाश, भी अतिवृष्टि के कारण अवकाश कर दिया जाता है, इसके अलावा अन्य क्रिया कलापों में भी काफी समय लग जाता है। ऐसी स्थिति में बच्चों का पाठ्यक्रम भी पूरा नहीं हो रहा है जिससे विद्यालयों मेें छात्रों की संख्या घटती जा रही है और विद्यालय बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं। उन्हांेने विद्यालयों को इन क्रिया कलापों से छूट प्रदान करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि ऐसा न हुआ तो मजबूरन उन्हें न्यायालय का सहारा लेना पडेगा।